श्री बुढ़ादेव को अर्पित किया गया नव अन्न का भोग, आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज ने निभाई परंपरा
ग्राम करैहा के बुढ़ादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद समाजजनों ने किया नव अन्न ग्रहण, संस्कृति और सामाजिक एकता का दिया संदेश
नगरी,गट्टासिल्ली। आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज ने अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक आस्था का निर्वहन करते हुए क्वांर नवमी के अवसर पर नव अन्न ग्रहण की परंपरा निभाई। इस अवसर पर समाज के लोग ग्राम करैहा स्थित श्री बुढ़ादेव मंदिर में एकत्रित हुए। यहां विधि-विधान से ईष्ट देवता श्री बुढ़ादेव की पूजा-अर्चना कर नई फसल के चावल से तैयार अन्न का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद समाजजनों ने परंपरानुसार नया अन्न ग्रहण किया।
आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज में नव अन्न ग्रहण की परंपरा का विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, नई फसल से प्राप्त अन्न को सबसे पहले अपने ईष्ट देवी-देवताओं को समर्पित किया जाता है। इसी परंपरा के अनुरूप समाज के लोगों ने श्री बुढ़ादेव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए नव अन्न का भोग लगाया और सुख-समृद्धि की कामना की।
पूजा-अर्चना के पश्चात सभी सामाजिक जनों ने एक साथ बैठकर नया अन्न ग्रहण किया। इस आयोजन के माध्यम से समाज के लोगों ने अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति आस्था प्रकट की। साथ ही प्रकृति से प्राप्त नई फसल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकजुटता का परिचय दिया।
इस अवसर पर रामूसिंग तारम, किस कुमार मारकोले, तुलाराम मण्डावी, कान्ता कुंजाम, श्यामाचरण मण्डावी, राधेलाल मण्डावी, द्वारिका प्रसाद नेताम, बल्दू राम मण्डावी, ईश्वर मण्डावी, सेवक राम मण्डावी, गौकरण मण्डावी, ईकलेश मण्डावी, पुरुषोत्तम कुंजाम, कृष्ण कुमार नेताम, शिवलाल मारकोले, बिरेंद्र सलाम, रामेश्वर नेताम, अनुप तारम, तुमेश कोर्राम, तामेश कुंजाम, जोहन नागवंशी, महादेव सलाम, सूरज ध्रुव, टेमेश कोर्राम एवं बिरेंद्र कोर्राम सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
नव अन्न ग्रहण की यह परंपरा आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति सम्मान और ईष्ट देवता के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से समाज की पुरातन परंपराएं जीवंत रहती हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों तथा सामाजिक मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

