90 व्ही आई पी लोगों के ट्रांसफर करने हेतु अनुशंसा पत्रों के बोझ तले दबे शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव जी,
ट्रांसपर की फाईल बंद हुई लेकिन व्ही आई पी लोगों के सिफारिशों का सिलसिला नहीं!
रायपुर। (खबरनवीस ) छ.ग. प्रदेश में शिक्षा मंत्री इन दिनों विभागीय कामकाज से ज्यादा प्रदेश के व्ही आई पी लोगों के तबादलों की सिफारिशों को लेकर परेशान बताये जा रहे है।
इन पंक्तियों के लिखे जाने तक शिक्षा विभाग में हजार से अधिक लोगों के तबादले हो चुके है, लेकिन सिफारिश करने वालो की संख्या में कोई कमी आने का नाम नहीं ले रही है।
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिक्षकों के तबादला तिथि से लेकर 22 सितम्बर 2026 समूचे प्रदेश के अलग-अलग जिले से अलग-अलग 92 व्ही.आई.पी लोगों के लगभग 712 शिक्षकों के तबादला हेतु अनुशंसा पत्र अब तक शिक्षा मंत्रालय को प्रेषित किये जा चुके है। वहीं शिक्षकों के तबादला किये जानें संबंधित ट्रांसपर आवेदन की तिथि सीजन समाप्त हो जाने के पश्चात, सिफारिशों का सीजन खत्म होने को तैयार नहीं है। वही जनगणना डयुटी में लगे षिक्षक षिक्षिकाओं के स्थानांतरण होने के घटना भी प्रकाष में आई है।
बताया जाता है कि मामला इतना बढ़ा कि मंत्री जी ने किस नेता, विधायक और जनप्रतिनिधि की अनुशंसा पर कितने तबादले हुए, इसका पूरा हिसाब-किताब तैयार कर संगठन और पार्टी के बड़े नेताओं तक पहुंचा दिया, अपनी परेशानी भी बता दी कि आखिर कितनी सिफारिशों को पूरा किया जाए और कितनों को समझाया जाए।
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ मंत्री-विधायक, सांसद सैकड़ों अनुशंसा पत्र लिखकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों को थमा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने खास लोगों की अलग सूची भी मंत्री जी तक पहुंचा रहे हैं। यानी अनुशंसा पत्र अलग और असली सूची अलग! अब मंत्री जी भी असमंजस में हैं कि किसे प्राथमिकता दें और किसे प्रतीक्षा सूची में रखें।
सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों को लेकर है, जिनके हाथ में जनप्रतिनिधियों का अनुशंसा पत्र तो है, लेकिन तबादला सूची में नाम नहीं है। ऐसे लोग अब अनुशंसा पत्र दिखाकर सवाल पूछ रहे हैं। कुछ नाराजगी जता रहे हैं तो कुछ मंत्री जी और उनके स्टाफ पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
मंत्री जी की मुश्किल यह है कि तबादला हो जाए तो आरोप, न हो तो भी आरोप! सिफारिश मान लें तो दूसरे नाराज, नहीं मानें तो सिफारिश करने वाले नाराज। ऊपर से कार्यकर्ताओं की उम्मीदें अलग।
कुल मिलाकर विभाग में तबादलों का काम भले ही निपट गया हो, लेकिन अनुशंसा पत्रों की फाइल अभी भी चल रही है। मंत्री जी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर तबादले ज्यादा मुश्किल हैं या तबादले की सिफारिश करने वालों को संभालना!

