“घायल तड़पते रहे, सिस्टम सोता रहा” – 108-1099 एंबुलेंस सेवा की खुली पोल, एक युवक की मौत

0

 


“घायल तड़पते रहे, सिस्टम सोता रहा” – 108-1099 एंबुलेंस सेवा की खुली पोल, एक युवक की मौत

    नगरी के समाज सेवीयों ने दिया मानवता का परिचय 



उत्तम साहू 

नगरी। शासन की बहुप्रचारित 108 और 1099 एंबुलेंस सेवाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। भारतमाला रोड पर चिंवरी-सांकरा के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर दी—जहां घायल सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची।

मिली जानकारी के अनुसार, खड़े मेटाडोर में एक इको कार तेज रफ्तार में जा घुसी। हादसे में पालगांव निवासी 25 वर्षीय फलेंद्र मंडावी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 6 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को बाद में धमतरी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हादसे के तुरंत बाद 108 और 1099 एंबुलेंस सेवा को फोन किया गया, लेकिन घंटों तक कोई सहायता नहीं पहुंची। घायल दर्द से कराहते रहे और परिजन बेबस होकर मदद का इंतजार करते रहे।

आखिरकार, समाजसेवी सन्नी छाजेड़ और ओमी जैन ने मानवता का परिचय देते हुए निजी वाहन से मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए नगरी लाया गया।

इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या सिर्फ कागजों में चल रही हैं एंबुलेंस सेवाएं?
क्या आम जनता की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?
फोन करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंचती?

घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती, तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी या हर बार की तरह इस घटना को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

जनता ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि एंबुलेंस सेवाओं की वास्तविक स्थिति की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी को इस तरह तड़प-तड़प कर जान न गंवानी पड़े।

Post a Comment

0Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !