सफलता की मिसाल: बहुआयामी खेती से बढ़ी आय, सगनू बने गांव के रोल मॉडल
डबरी, खेती और मछली पालन से बदली जिंदगी, अब गांव के लिए प्रेरणा बने सगनू राम
उत्तम साहू
धमतरी, 16 अप्रैल 2026। ग्रामीण विकास की दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) आज एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। यह योजना सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के जरिए ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। इसका जीवंत उदाहरण अरौद डुबान क्षेत्र के ग्राम कलारबाहरा निवासी सगनू राम हैं, जिन्होंने मेहनत, नवाचार और योजनाओं के सही उपयोग से अपनी आर्थिक स्थिति बदल दी।
सगनू राम एक छोटे कृषक परिवार से आते हैं। सीमित भूमि और वर्षा आधारित खेती के कारण उनकी आय अनिश्चित रहती थी। सिंचाई सुविधा नहीं होने से वे वर्ष में केवल एक फसल ही ले पाते थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो जाता था।
स्थिति तब बदली जब उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से मनरेगा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने वर्ष 2023-24 में अपने खेत में 25×25 मीटर डबरी निर्माण के लिए आवेदन किया, जिसे स्वीकृति मिली। करीब 2.98 लाख रुपये की लागत से बनी डबरी ने उनके खेत को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराया।
डबरी बनने के बाद सगनू राम की खेती में बड़ा बदलाव आया। अब वे नियमित सिंचाई कर पा रहे हैं, जिससे 2 एकड़ धान की खेती में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ी है। इसके साथ ही कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 1.5 एकड़ में माड़िया (रागी) की खेती शुरू की, जिससे उन्हें लगभग 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई।
यहीं नहीं, सगनू राम ने डबरी में मछली पालन भी शुरू किया, जिससे उन्हें हर साल करीब 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इस तरह उन्होंने जल संरक्षण, बहुफसली खेती और मत्स्य पालन को जोड़कर आय का मजबूत मॉडल तैयार किया।
उन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों जैसे फसल चक्र, जैविक खाद और जल प्रबंधन तकनीकों को भी अपनाया है, जिससे लागत कम हुई और उत्पादन बेहतर हुआ। अब वे भविष्य में सब्जी उत्पादन और ड्रिप सिंचाई जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने की योजना बना रहे हैं।
आज सगनू राम आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता को देखकर आसपास के किसान भी मनरेगा के तहत डबरी निर्माण और आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
सगनू राम की कहानी यह संदेश देती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाया जाए और मेहनत के साथ नवाचार जोड़ा जाए, तो सीमित संसाधनों में भी समृद्धि और आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।

