मां से रूठकर निकली थी 13 साल की मासूम, रास्ते में तीन 'दरिंदों' ने लूटी आबरू
बिलासपुर। कहते हैं बच्चे जब अपनों से नाराज होते हैं, तो दुनिया की भीड़ में सुरक्षा तलाशते हैं। लेकिन बिलासपुर (न्यायधानी) से जो खबर आई है, उसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी गलियां मासूमों के लिए नरक बन चुकी हैं? मां की एक मामूली डांट से नाराज होकर घर से निकली 13 साल की एक नाबालिग को क्या पता था कि बाहर अंधेरे में उसका बचपन उजाड़ने के लिए भेड़िए घात लगाए बैठे हैं।
तोरवा थाना क्षेत्र में एक मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
घटनाक्रम की शुरुआत शनिवार को हुई। पीड़िता की मां ने उसे एक जगह काम पर लगा दिया था। बच्ची काम नहीं करना चाहती थी, लेकिन जब मां ने जिद की, तो वह नाराज होकर चुपचाप घर से भाग निकली।
रास्ते में उसे एक 16 वर्षीय परिचित किशोर मिला। एक बेसहारा और डरी हुई लड़की को देखकर उस किशोर के भीतर का इंसान मर गया। उसने 'सुरक्षित ठिकाने' पर छोड़ने का झांसा देकर बच्ची का भरोसा जीता। वह उसे बहला-फुसलाकर रेलवे स्टेशन के आगे एक सुनसान इलाके में ले गया। वहां उसने पहले उसे खाना खिलाया—शायद यह उस दरिंदगी से पहले का छलावा था, जो वह करने जा रहा था।
सुनसान इलाका और तीन हैवान
मुख्य आरोपी ने वहां पहुंचने के बाद अपने दो अन्य दोस्तों को भी फोन करके बुला लिया। इसके बाद उन तीनों नाबालिगों ने मिलकर उस बेबस बच्ची के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। चीखती-चिल्लाती मासूम की आवाज उस सुनसान इलाके में दफन होकर रह गई।
वारदात को अंजाम देने के बाद, तीनों आरोपी उस मरणासन्न हालत में पहुंची बच्ची को वापस रेलवे स्टेशन पर लावारिस छोड़कर भाग गए। खौफ और दर्द से कांपती उस 13 साल की बच्ची ने रोते हुए पूरी रात स्टेशन के एक कोने में काटी।
रविवार सुबह पीड़िता किसी तरह घिसटते हुए अपने घर पहुंची। बदहवास बेटी को देख परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जब रोते हुए मासूम ने अपनी आपबीती सुनाई, तो परिजनों का कलेजा मुंह को आ गया। वे तुरंत उसे लेकर तोरवा थाने पहुंचे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एडिशनल एसपी (ASP) उमेश कुमार कश्यप ने बताया:
शिकायत मिलते ही टीआई और उच्च अधिकारी एक्टिव हुए।आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस की विशेष टीम ने जाल बिछाया और रविवार दोपहर तक तीनों आरोपी किशोरों को चारों तरफ से घेरकर धर दबोचा।
एक बड़ा सवाल (संपादकीय टिप्पणी)
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि हमारे समाज के मानसिक दिवालियापन का सबूत है। इस मामले में पीड़ित भी नाबालिग है और तीनों आरोपी भी किशोर हैं। आखिर हमारी नई पीढ़ी किस दिशा में जा रही है? क्या इंटरनेट का बेलगाम इस्तेमाल या संस्कारों की कमी इन किशोरों को इस कदर हैवान बना रही है? कानून तो अपना काम करेगा और इन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजेगा, लेकिन समाज के तौर पर हमें सोचना होगा कि हम अपने बच्चों को कैसा माहौल दे रहे हैं।

