60 लाख के प्रधानमंत्री जनमन योजना भवन का उद्घाटन रोका, फिर उसी भवन में प्रशासन ने किया कार्यक्रम : अरुण सार्वा

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60 लाख के प्रधानमंत्री जनमन योजना भवन का उद्घाटन रोका, फिर उसी भवन में प्रशासन ने किया कार्यक्रम : अरुण सार्वा

खड़मा-सिंगपुर विवाद पर जिला पंचायत अध्यक्ष ने उठाए गंभीर सवाल, प्रभारी मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत की चेतावनी



उत्तम साहू,धमतरी। जिले के मगरलोड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खड़मा एवं सिंगपुर में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत लगभग 60 लाख रुपये की लागत से निर्मित बहुउद्देशीय केंद्र भवन को लेकर नया विवाद सामने आया है। जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जिस भवन के प्रस्तावित लोकार्पण कार्यक्रम को अंतिम समय में प्रशासन ने निरस्त कर दिया, उसी भवन में बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने जनसमूह की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई है और मामले की शिकायत उच्च स्तर तक करने की बात कही है।

अरुण सार्वा ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत निर्मित यह बहुउद्देशीय केंद्र भवन क्षेत्र की जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। भवन के लोकार्पण के लिए विधिवत कार्यक्रम निर्धारित किया गया था, जिसमें जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति भी प्रस्तावित थी। ग्रामीणों में भी इस आयोजन को लेकर उत्साह का वातावरण था। लेकिन कार्यक्रम के ठीक पहले प्रशासन द्वारा इसे निरस्त कर दिया गया, जिससे लोगों में निराशा और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई।



उन्होंने कहा कि लोकार्पण कार्यक्रम रद्द होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों का उसी भवन में पहुंचकर कार्यक्रम आयोजित करना कई सवाल खड़े करता है। यदि भवन किसी कारणवश उद्घाटन के लिए तैयार नहीं था, तो उसमें प्रशासनिक कार्यक्रम कैसे आयोजित किया गया? और यदि भवन उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार था, तो फिर जनता और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में होने वाले लोकार्पण कार्यक्रम को रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी का आरोप

जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि यह केवल एक भवन का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा विषय है। विकास कार्य जनता के धन से किए जाते हैं और उनका लोकार्पण जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की उपस्थिति में होना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है। ऐसे में कार्यक्रम को निरस्त कर बाद में प्रशासनिक आयोजन करना उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम से यह संदेश गया है कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है। लोकतंत्र में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय आवश्यक है, लेकिन इस मामले में पारदर्शिता और संवाद का अभाव दिखाई देता है।

ग्रामीणों में भी नाराजगी और भ्रम की स्थिति

अरुण सार्वा के अनुसार खड़मा और सिंगपुर के ग्रामीणों के बीच भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि जिस भवन का औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ, उसमें कार्यक्रम किस आधार और अधिकार से आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए ताकि लोगों के मन में पैदा हुए भ्रम को दूर किया जा सके।

प्रधानमंत्री जनमन योजना से जुड़ा है मामला

जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातियों और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना है। ऐसे महत्वपूर्ण प्रकल्प के लोकार्पण को लेकर उत्पन्न विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य जनकल्याण है, इसलिए इससे जुड़े कार्यक्रमों में पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि प्रशासनिक स्तर पर कोई निर्णय लिया गया था, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

उच्च स्तर पर शिकायत की चेतावनी

अरुण सार्वा ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की शिकायत छत्तीसगढ़ शासन के प्रभारी मंत्री, आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश एवं राष्ट्रीय नेतृत्व तथा प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजी जाएगी।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और प्रशासनिक मनमानी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इस विषय को गंभीरता से उठाया जाएगा। प्रशासन को ऐसे निर्णयों से बचना चाहिए, जिनसे जनता के बीच भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो। विकास कार्यों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनप्रतिनिधियों के सम्मान के साथ कार्य करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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