बस्तर में विकास का नया अध्याय: कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज बना सुशासन और विश्वास की मिसाल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया निरीक्षण, कहा- अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
रायपुर/बीजापुर। एक समय था जब बस्तर के कई गांव बरसात आते ही दुनिया से कट जाते थे। बीमारों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती था, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी लंबी मशक्कत करनी पड़ती थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। विकास की नई इबारत लिखते बस्तर में कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज केवल लोहे और स्टील का ढांचा नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों के सपनों को जोड़ने वाला मजबूत सेतु बन गया है।
सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai मंगलवार को बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र कोण्डापल्ली पहुंचे और बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित आधुनिक बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। पुल का अवलोकन करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है और इसके लिए सड़क, पुल तथा संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार लगातार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं होता, बल्कि लोगों तक पहुंच बनाने वाली आधारभूत संरचनाओं से होता है। सड़कें और पुल गांवों को शहरों से जोड़ते हैं, मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाते हैं, बच्चों को स्कूल और युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ते हैं।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि Border Roads Organisation (बीआरओ) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। पारंपरिक पुलों की तुलना में इसकी लागत काफी कम है और इसे बेहद कम समय में तैयार किया जा सकता है। विशेष रूप से दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्रों में यह तकनीक तेज़ और प्रभावी कनेक्टिविटी प्रदान कर रही है।
बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण हो चुका है। इन पुलों के बनने से कई ऐसे गांव, जो वर्षों तक आवागमन की समस्याओं से जूझते रहे, अब मुख्य मार्गों से जुड़ गए हैं। ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में बड़ी राहत मिली है। विकास की रफ्तार ने उन इलाकों तक दस्तक दी है, जहां कभी पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था।
मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों और स्थानीय युवाओं से मुलाकात कर उनकी मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं की सफलता के पीछे इन्हीं मेहनतकश हाथों का योगदान होता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी क्षेत्र के भविष्य को मजबूत बनाने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि बस्तर में बढ़ते विश्वास, मजबूत होते सुशासन और बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह दिखाता है कि जब सरकार की नीयत और प्रयास मजबूत हों तो दुर्गम से दुर्गम क्षेत्र भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं।
आज कोण्डापल्ली का यह पुल केवल दो किनारों को नहीं जोड़ रहा, बल्कि बस्तर के लोगों की उम्मीदों, सपनों और बेहतर भविष्य को भी जोड़ रहा है। यह उस नए बस्तर की कहानी कह रहा है, जहां अब दूरी नहीं, विकास की रफ्तार दिखाई दे रही है।

