अभनपुर से राहुल का संदेश: ‘एकजुट कांग्रेस ही बनेगी भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती’
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर में शनिवार को राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीधे संगठन की नब्ज टटोली। अभनपुर में आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ मैराथन बैठकों के जरिए कांग्रेस को एकजुट रहने का संदेश दिया।
करीब डेढ़ घंटे तक चले संवाद सत्र में राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से जमीनी हकीकत जानी। नेताओं ने संगठन की चुनौतियों, कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और स्थानीय स्तर की समस्याओं को खुलकर उनके सामने रखा। राहुल ने भी संगठन को मजबूत बनाने के लिए संवाद, समन्वय और सक्रियता पर जोर दिया।
इसके बाद कांग्रेस की राजनीति का सबसे अहम दौर बंद कमरे में देखने को मिला, जहां राहुल गांधी ने प्रदेश के 37 वरिष्ठ नेताओं के साथ गोपनीय बैठक की। बैठक में सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपक बैज, चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव समेत कांग्रेस के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक बैठक का मूल मंत्र था—"मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं।" राहुल गांधी ने नेताओं से कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की मजबूत राजनीतिक जमीन है, लेकिन इसकी असली ताकत संगठन की एकजुटता में है। यदि सभी नेता और कार्यकर्ता साझा लक्ष्य के साथ काम करें तो पार्टी और अधिक मजबूत होकर उभर सकती है।
बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति, संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं की भूमिका और भविष्य की चुनावी तैयारियों पर भी मंथन हुआ। राहुल गांधी ने स्पष्ट संकेत दिए कि आने वाले समय में कांग्रेस का फोकस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सामूहिक नेतृत्व की भावना को बढ़ाने पर रहेगा।
अभनपुर के प्रशिक्षण शिविर से निकला संदेश साफ था— कांग्रेस की ताकत उसके नेताओं की एकजुटता और कार्यकर्ताओं की सक्रियता में है, और इसी सूत्र के सहारे पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रही है।

