छत्तीसगढ़: अंधविश्वास में दो सगे भाइयों की हत्या करने वाली मां, दो बहनों और भाई को उम्रकैद

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 छत्तीसगढ़: अंधविश्वास में दो सगे भाइयों की हत्या करने वाली मां, दो बहनों और भाई को उम्रकैद



सक्ती (छत्तीसगढ़):  के सक्ती जिले से अंधविश्वास और क्रूरता की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां अदालत ने अपने ही दो सगे भाइयों की तंत्र-मंत्र के चक्कर में हत्या करने वाले परिवार के चार सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह खौफनाक मामला बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम तांदुलडीह का है।

अंधविश्वास का विरोध करने पर रची साजिश

जांच में सामने आया कि परिवार की बड़ी बेटी अमरिका सिदार ने करीब 6 साल पहले उज्जैन के उमाकांत नामक बाबा से गुरु दीक्षा ली थी। इसके बाद से ही घर में तंत्र साधना और अंधविश्वास का माहौल लगातार बढ़ता चला गया। परिवार के दो युवा बेटों, विकास सिदार (25) और विक्की सिदार (22) को यह सब पसंद नहीं था और वे लगातार इस अंधविश्वास का विरोध करते थे तथा परिवार को इससे दूर रहने की सलाह देते थे।

इसी विरोध के कारण मां, बहनों और भाई ने मिलकर दोनों युवकों को रास्ते से हटाने की एक खौफनाक साजिश रची। उन्होंने दोनों भाइयों को अंतिम बार 'गुरु पूजा' और 'विशेष जाप' में शामिल होने के बहाने बुलाया और अंधविश्वास के खेल को धार्मिक अनुष्ठान का रूप दे दिया।

      कमरे में बंद कर दिया जहर, फिर घोंटा गला

वारदात से 7 दिन पहले से ही सभी आरोपी उपवास पर थे। उन्होंने दोनों भाइयों को एक कमरे में बंद कर दिया और तंत्र पूजा शुरू कर दी। जब भाइयों ने विरोध किया, तो उन्हें पानी में कीटनाशक (जहर) मिलाकर पिला दिया गया और उसके बाद उनका गला घोंटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई।

अक्टूबर 2024 में, जब कई दिनों तक परिवार का कोई भी सदस्य घर से बाहर नहीं निकला और कमरे के अंदर से लगातार चिल्लाने व 'जय गुरुदेव' के नारे लगाने की आवाजें आती रहीं, तो पड़ोसियों को शक हुआ। पड़ोसियों की सूचना पर 17 अक्टूबर 2024 को जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो अंदर का नजारा हैरान करने वाला था। कमरे में उज्जैन के बाबा की तस्वीर लगी थी और परिवार के सदस्य तंत्र साधना व धार्मिक अनुष्ठान में लीन थे।

       जीवित होने का किया दावा

पुलिस को कमरे के फर्श पर विकास और विक्की अचेत अवस्था में मिले। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हैरान करने वाली बात यह थी कि अंधविश्वास में डूबे आरोपी और कुछ प्रत्यक्षदर्शी यह दावा कर रहे थे कि दोनों युवक 'सत्संग' सुनने गए हैं और विशेष साधना के जरिए उन्हें दोबारा जीवित किया जा सकता है। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम पर संदेह जताते हुए मामले की गहन जांच शुरू की।

 फॉरेंसिक और परिस्थितिजन्य सबूतों से साबित हुआ गुनाह

घटनास्थल की जांच के दौरान पुलिस, FSL (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) और मेडिकल टीम ने संयुक्त कार्रवाई की। मौके से पूजा सामग्री, हवन सामग्री, धार्मिक साहित्य, नोटबुक, जड़ी-बूटियां, कीटनाशक और कपड़े बरामद किए गए।

पुलिस ने चारों आरोपियों—मां फिरीतबाई सिदार, बहन अमरिका सिदार, चंद्रिका और भाई विशाल—के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया।


करीब डेढ़ साल तक चली अदालती सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (जिसकी पैरवी अपर लोक अभियोजक उदय वर्मा ने की) ने गवाहों के बयान, FSL रिपोर्ट और अकाट्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी तथ्यों और सबूतों का बारीकी से परीक्षण करने के बाद चारों आरोपियों को दोहरे हत्याकांड का दोषी पाया और उन्हें आजीवन सश्रम कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई।

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