राष्ट्रपति पुरस्कार की राशि से विकास की जगह कॉम्प्लेक्स निर्माण पर उठे सवाल,

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राष्ट्रपति पुरस्कार की राशि से विकास की जगह कॉम्प्लेक्स निर्माण पर उठे सवाल, 

हरदीभाठा पंचायत का फैसला अदालत में घिरा,हाईकोर्ट ने लगाई रोक


उत्तम साहू,नगरी। राष्ट्रपति से उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मान और पुरस्कार राशि प्राप्त करने वाली ग्राम पंचायत हरदीभाठा अब विकास कार्यों के बजाय विवादित व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण को लेकर सुर्खियों में है। ग्रामवासियों और क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया है कि पंचायत को मिली उपलब्धियों का लाभ गांव की मूलभूत सुविधाओं पर खर्च करने के बजाय शासकीय भूमि पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़ा करने की दिशा में कदम उठाए गए, जिसके खिलाफ मामला अब सीधे हाईकोर्ट पहुंच गया है।

जानकारी के अनुसार, हरदीभाठा पंचायत में उन स्थानों पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण की तैयारी की जा रही थी, जहां किसानों के खेत और सड़क के बीच थोड़ी-बहुत शासकीय भूमि मौजूद है। आरोप है कि पंचायत द्वारा कलेक्टर से उक्त भूमि का आबंटन करवाकर निर्माण कार्य शुरू कराया गया और कुछ स्थानों पर निर्माण भी कराया जा चुका है।

विवाद तब और बढ़ गया जब नगरी-सिहावा मुख्य मार्ग पर स्थित हरदीभाठा की भूमि का पटवारी से सीमांकन कराकर नए कॉम्प्लेक्स निर्माण की तैयारियां तेज कर दी गईं। इसे लेकर प्रभावित किसानों और स्थानीय लोगों ने न्यायालय की शरण ली।

बेलर निवासी प्रशांत चोपड़ा द्वारा दायर याचिका डब्ल्यूपीसी क्रमांक 2925/2026 पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 19 जून 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया कि जिस धारा 237(2) भू-राजस्व संहिता के तहत भूमि आबंटन किया गया, वह वर्ष 2012 में ही समाप्त हो चुकी है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया इस तथ्य को गंभीर मानते हुए शासन से जवाब तलब किया।

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया। इसके बाद न्यायालय ने कलेक्टर धमतरी द्वारा 30 मार्च 2026 को हरदीभाठा सरपंच के पक्ष में किए गए भूमि आबंटन आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक (स्टे) लगा दी।

स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि सड़क किनारे बड़ी संख्या में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बन जाते, तो खेतों तक पहुंचने वाले पारंपरिक रास्ते बाधित हो जाते और कृषि कार्य प्रभावित होता। न्यायालय के आदेश से न केवल याचिकाकर्ता को बल्कि कई किसानों को राहत मिली है।

बताया जा रहा है कि इस मामले में सोमनाथ देवांगन, प्रदीप देवांगन, भोमराज देवांगन और वेदप्रकाश देवांगन सहित अन्य किसानों ने भी अलग से याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई होना बाकी है।

क्षेत्र में अब यह बहस तेज हो गई है कि पंचायत को मिली प्रतिष्ठा और पुरस्कार राशि का उपयोग गांव की मूलभूत सुविधाओं—सड़क, पानी, स्वच्छता और जनसुविधाओं—पर होना चाहिए या फिर विवादित व्यावसायिक परियोजनाओं पर। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिक गई हैं और अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है।

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