प्राथमिक शालाओं में सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी देंगे अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता

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प्राथमिक शालाओं में सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी देंगे अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता

‘हमर गांव हमर शाला’ अभियान के तहत एनआरएलएम कैडर होंगे सहयोगी, बच्चों की उपस्थिति और सीखने के स्तर में सुधार पर जोर


उत्तम साहू 

धमतरी, 29 सितंबर। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले की प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने और मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को मजबूत करने के लिए ‘हमर गांव हमर शाला’ अभियान के अंतर्गत सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी व्यवस्था लागू करने की पहल की जा रही है। इसके तहत ऐसे प्राथमिक विद्यालयों को चिन्हांकित किया जाएगा, जहां विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है।

इन विद्यालयों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के चयनित कैडर सदस्यों को सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी के रूप में जोड़ा जाएगा। प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के सहयोग से चयनित सहयोगियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद वे संबंधित विद्यालयों में शिक्षकों के समन्वय से बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराएंगे।

सहयोगियों का मुख्य फोकस बच्चों की पढ़ने, लिखने, समझने तथा बुनियादी गणितीय दक्षताओं को मजबूत करने पर रहेगा। साथ ही विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, कक्षा में सहभागिता और सीखने के स्तर में सुधार के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।


स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर जोर

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने बताया कि ‘हमर गांव हमर शाला’ अभियान का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा को समुदाय से जोड़कर बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। इस व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मानव संसाधनों की सहभागिता सुनिश्चित कर विद्यार्थियों को उनकी सीखने की आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त सहयोग दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पहल की सफलता के लिए ग्राम पंचायत, शाला विकास एवं प्रबंधन समिति, शिक्षक, एनआरएलएम कैडर और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। समुदाय की सक्रिय भागीदारी से विद्यालय के प्रति स्वामित्व की भावना मजबूत होगी तथा बच्चों की शिक्षा में अभिभावकों और ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ेगी।


शिक्षकों के साथ समन्वय से होगा कार्य

सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगियों को बच्चों के सीखने के स्तर के आकलन, कक्षा एवं आयु के अनुरूप गतिविधियों तथा भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताओं के विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद वे शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के साथ कार्य करेंगे। विशेष रूप से उन बच्चों पर ध्यान दिया जाएगा, जिन्हें पढ़ने, लिखने अथवा गणित की बुनियादी अवधारणाओं को समझने में अतिरिक्त सहायता की जरूरत है।

यह व्यवस्था अस्थायी एवं गैर-नियमित स्वरूप की होगी। इसका उद्देश्य नियमित शिक्षकों के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था करना नहीं, बल्कि बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग देना है। शिक्षक नियमित शिक्षण कार्य करते हुए सहयोगियों के साथ समन्वय बनाए रखेंगे।

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