नगरी..किसान बने अपने कारोबार के मालिक, महिला नेतृत्व ने दिखाई नई राह
गट्टासिल्ली एफपीसी की पांच साल की यात्रा में सामूहिक स्वामित्व और महिला भागीदारी बनी बदलाव की पहचान
उत्तम साहू,नगरी, 1 अक्टूबर 2026। गांवों की अर्थव्यवस्था अब केवल खेती और फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। किसान सामूहिक निर्णय, बाजार की समझ और अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य हासिल करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड की गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) की पांच वर्षों की यात्रा इसी बदलाव की कहानी बयां करती है। यहां किसान और महिला किसान मिलकर अपने स्वामित्व वाले व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं।
सेवा संकल्प अभियान के तहत 29 सितंबर को आयोजित एफपीसी की वार्षिक आमसभा में करीब 550 शेयरधारक शामिल हुए। नगरी विकासखंड के पांचों सीएलएफ से पहुंचे महिला एवं पुरुष शेयरधारकों ने एफपीसी की पांच वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों, व्यवसायिक गतिविधियों, वित्तीय स्थिति, ऑडिट, लाभ और आगामी योजनाओं की जानकारी ली। शेयरधारकों ने सामूहिक व्यवसाय को और मजबूत करने के लिए अपने सुझाव भी साझा किए।
चुनौती से विश्वास तक का सफर
एफपीसी की शुरुआत में किसानों, विशेषकर महिला किसानों को संगठित करना और उन्हें शेयरधारक के रूप में जोड़ना बड़ी चुनौती थी। समय के साथ लगातार संवाद, सामूहिक निर्णय और अनुभवों से किसानों का विश्वास बढ़ा। आज शेयरधारक एफपीसी को अपनी संस्था और किसान-स्वामित्व वाले व्यवसाय के रूप में देख रहे हैं।
वार्षिक आमसभा में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्यों ने शुरुआती वर्षों के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि संगठन खड़ा करने और किसानों को व्यवसायिक गतिविधियों से जोड़ने के दौरान कई चुनौतियां आईं, लेकिन सामूहिक प्रयासों से एफपीसी की गतिविधियों में भागीदारी मजबूत होती गई।
खेत से बाजार तक सामूहिक पहुंच
गट्टासिल्ली एफपीसी द्वारा सुगंधित धान, नगरी दुबराज, लघु वनोपज सहित अन्य कृषि एवं वन आधारित उत्पादों के सामूहिक विपणन के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों, विशेषकर महिला किसानों को बाजार से जोड़ने तथा उत्पाद की गुणवत्ता, मांग और मूल्य की बेहतर जानकारी हासिल करने का अवसर मिल रहा है।
एफपीसी मॉडल किसानों को उत्पादन के साथ-साथ सामूहिक विपणन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क की समझ विकसित करने में मदद कर रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्यमिता के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
महिला किसान बनीं निर्णय प्रक्रिया की भागीदार
गट्टासिल्ली एफपीसी की यात्रा में महिला किसानों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है। स्वयं सहायता समूहों और सीएलएफ से जुड़ी महिलाओं को एफपीसी से जोड़ने से उनके लिए आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी के नए अवसर खुले हैं।
महिलाएं अब केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि बोर्ड और सामूहिक व्यवसाय की गतिविधियों में सक्रिय भागीदार के रूप में आगे आ रही हैं। इससे परिवार और समुदाय की आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका को मजबूती मिल रही है।
आमसभा में दिखा कृषि और संस्कृति का संगम
वार्षिक आमसभा में व्यवसायिक और वित्तीय विषयों के साथ नगरी की कृषि संस्कृति की भी झलक देखने को मिली। पांचों सीएलएफ की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। “छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा क्यों कहा जाता है” जैसे विषयों के साथ पुनर्योजी कृषि पद्धतियों के महत्व को भी प्रस्तुत किया गया। बच्चों के युगल और सामूहिक नृत्य ने कार्यक्रम में उत्साह भर दिया।
पांच साल की यात्रा, आगे नई संभावनाएं
गट्टासिल्ली एफपीसी की पांच वर्षों की यात्रा ने किसानों के सामूहिक स्वामित्व और भागीदारी को मजबूत किया है। आगे उत्पादों में विविधता, गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क और डिजिटल माध्यमों के उपयोग की दिशा में संभावनाएं हैं।
सेवा संकल्प अभियान की भावना के अनुरूप एफपीसी किसानों को विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में काम कर रही है। गट्टासिल्ली की यह यात्रा सामूहिकता से स्वामित्व, स्वामित्व से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते ग्रामीण बदलाव की कहानी प्रस्तुत करती है।

