धमतरी की ऐतिहासिक वनोपज मंडी फिर हुई गुलजार, हर सोमवार लगेगी बोली

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धमतरी की ऐतिहासिक वनोपज मंडी फिर हुई गुलजार, हर सोमवार लगेगी बोली

श्यामतराई मंडी में नियमित खरीदी-बिक्री शुरू, पूर्व विधायक रंजना साहू ने किया शुभारंभ; पांच स्व-सहायता समूहों को मिले 25-25 हजार रुपये के प्रोत्साहन चेक


उत्तम साहू 

धमतरी, 12 अक्टूबर 2026। धमतरी की दशकों पुरानी ऐतिहासिक वनोपज मंडी एक बार फिर गुलजार हो उठी है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत श्यामतराई स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में सोमवार को वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के नियमित क्रय-विक्रय का शुभारंभ पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू ने किया। अब प्रत्येक सोमवार को सुबह 10 बजे से यहां वनोपज की खरीदी-बिक्री होगी। खुली बोली के माध्यम से किसानों और वनोपज संग्राहकों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।



मंडी के पुनः संचालन से धमतरी सहित आसपास के वनांचल क्षेत्रों के किसानों, संग्राहकों, व्यापारियों और स्थानीय उद्यमियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर नियमित बाजार उपलब्ध होने से उत्पादकों को दूरस्थ मंडियों पर निर्भरता कम करने, परिवहन खर्च बचाने और अपनी उपज के विपणन के लिए बेहतर मंच मिलेगा।


शुभारंभ अवसर पर आठ कृषक अपनी वनोपज लेकर पहुंचे। उन्होंने अश्वगंधा, हर्रा और गिलोय सहित अन्य उत्पादों की बोली के माध्यम से बिक्री की। अतिथियों की उपस्थिति में हुई खरीदी-बिक्री से मंडी में नियमित व्यापार और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य निर्धारण की संभावनाओं को बढ़ावा मिला।


 वनोपज संग्राहकों को उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता : रंजना साहू



पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू ने कहा कि ऐतिहासिक वनोपज मंडी का पुनः संचालन धमतरी की व्यापारिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ किसानों और वनोपज संग्राहकों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। वनांचल के अनेक परिवार लघु वनोपज और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर नियमित बाजार मिलने से उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर प्रतिफल प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।


उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों, ग्रामीण परिवारों, महिला स्व-सहायता समूहों और वन आधारित आजीविका से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर खरीदी-बिक्री के साथ प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन की सुविधाएं विकसित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने व्यापारियों से अधिक से अधिक उत्पादकों को मंडी से जोड़ने और उनकी उपज की खरीदी में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।


 कच्ची वनोपज के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर जोर



कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि मंडी को दोबारा सक्रिय करने का उद्देश्य कृषकों और वनोपज संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। नियमित क्रय-विक्रय की व्यवस्था से समय और परिवहन लागत की बचत होगी तथा विपणन प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनेगी।


उन्होंने कहा कि धमतरी जिले में वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाएं हैं। वन क्षेत्र से प्राप्त उत्पादों को केवल कच्चे रूप में बाहर भेजने के बजाय स्थानीय स्तर पर उनके प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे संग्राहकों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ युवाओं, महिला समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।

पांच स्व-सहायता समूहों को 25-25 हजार रुपये की सहायता


कार्यक्रम में कृषि सुधार विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत पांच स्व-सहायता समूहों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए गए। इसके साथ ही व्यक्तिगत कृषकों को भी सम्मानित किया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण समूहों की आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और उन्हें उत्पादन, प्रसंस्करण तथा विपणन से जोड़ना है।


वनमंडलाधिकारी श्री श्रीकृष्णा जाधव ने जिले में उपलब्ध वनोपज और वन संपदा की संभावनाओं की जानकारी दी। जिला लघु वनोपज व्यापारी संघ के अध्यक्ष श्री इस्तियाक रोकड़िया तथा श्री सत्यनारायण राठी ने भी अपने विचार रखे।


 हर सोमवार सुबह 10 बजे से होगी खरीदी-बिक्री


कृषि उपज मंडी समिति धमतरी के अनुसार, श्यामतराई मंडी परिसर में शेड क्रमांक-01 के पोल क्रमांक 04 से 08 तक का हिस्सा वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के क्रय-विक्रय के लिए आरक्षित किया गया है। यहां प्रत्येक सोमवार सुबह 10 बजे से कार्य समाप्ति तक खरीदी-बिक्री होगी। किसान और वनोपज संग्राहक निर्धारित स्थल पर अपनी उपज लेकर पहुंच सकते हैं।


उल्लेखनीय है कि श्यामतराई क्षेत्र लंबे समय से वनोपज व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। वनांचल और मैदानी क्षेत्रों के बीच स्थित होने के कारण यहां स्थानीय उत्पादों के कारोबार की व्यापक संभावनाएं हैं। पहले कई उत्पादकों और व्यापारियों को वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के व्यापार के लिए बस्तर और जगदलपुर जैसे केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब नियमित मंडी शुरू होने से स्थानीय व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।


ऐतिहासिक वनोपज मंडी का पुनः संचालन धमतरी की पुरानी व्यापारिक पहचान को मजबूत करने के साथ वन आधारित आजीविका और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में यह मंडी स्थानीय उत्पादों के संग्रहण, खरीदी-बिक्री और मूल्य संवर्धन के माध्यम से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।


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