सफलता की कहानी: ‘निदान’ से लावण्या के नन्हे कदमों को मिला सहारा, खिल उठा परिवार
नौ वर्षीय लावण्या को मिला कैलिपर, बेटी को अपने पैरों पर खड़े होकर आगे बढ़ते देख माता-पिता की आंखें खुशी से हुईं नम
धमतरी, 11 अक्टूबर। किसी बच्चे के लिए अपने पैरों पर चलना भले ही रोजमर्रा की सामान्य बात हो, लेकिन नौ वर्षीय लावण्या साहू और उसके परिवार के लिए यह पल किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है। बचपन से पैरों में तकलीफ के कारण चलने-फिरने में परेशानी झेल रही लावण्या को जिला स्तरीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर के माध्यम से सहारे की नई उम्मीद मिली है। शिविर में उसके पैरों का माप लेकर कैलिपर उपलब्ध कराया गया। इस सहायक उपकरण की मदद से जब लावण्या ने अपने नन्हे कदम आगे बढ़ाए, तो बेटी को आगे बढ़ते देख माता-पिता की आंखें खुशी से भर आईं। परिवार के लिए यह सिर्फ एक सहायक उपकरण मिलने की घटना नहीं, बल्कि बेटी के बेहतर भविष्य की उम्मीद को नई उड़ान मिलने जैसा है।
राजिम क्षेत्र के ग्राम खर्रा निवासी लावण्या साहू के पिता हेमंत कुमार साहू और माता क्षत्रिका साहू लंबे समय से यही चाहते थे कि उनकी बेटी भी दूसरे बच्चों की तरह चल-फिर सके, उनके साथ खेल सके और आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन में आगे बढ़े। बेटी की परेशानी को देखते हुए उन्हें हमेशा उसके भविष्य की चिंता सताती थी। ऐसे में लावण्या को कैलिपर मिलने से परिवार को बड़ी राहत मिली है। बेटी को अपने पैरों पर खड़े होकर आगे बढ़ने का अवसर मिलना उनके लिए भावुक कर देने वाला पल बन गया।
‘निदान-03’ शिविर बना उम्मीद की नई किरण
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ विशेष शिविर जरूरतमंद दिव्यांगजनों के लिए मददगार साबित हो रहा है। शिविर में विशेषज्ञों ने लावण्या की स्थिति का आकलन कर उसके पैरों का माप लिया और जरूरत के अनुसार कैलिपर उपलब्ध कराया। इस पहल से लावण्या को चलने-फिरने में सहायता मिलने तथा दैनिक गतिविधियों में अधिक सहजता लाने की उम्मीद जगी है।
कैलिपर मिलने के बाद लावण्या और उसके परिवार के चेहरे पर खुशी साफ झलकने लगी। जिस सहारे की उम्मीद में परिवार लंबे समय से प्रयासरत था, वह अब उन्हें उपलब्ध हुआ है। लावण्या के छोटे-छोटे कदमों ने माता-पिता के मन में यह विश्वास जगाया कि उचित सहायता और प्रोत्साहन से उनकी बेटी भी आगे बढ़ने के नए रास्ते तलाश सकेगी।
बेटी की खुशी बनी माता-पिता के लिए सबसे बड़ा उपहार
लावण्या के पिता हेमंत कुमार साहू ने इस सहयोग के लिए जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को कैलिपर मिलना परिवार के लिए बड़ी राहत और खुशी की बात है। इससे लावण्या को अपनी दैनिक गतिविधियों में आगे बढ़ने और आत्मविश्वास विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सहायक उपकरणों से आत्मनिर्भरता की राह
‘निदान-03’ शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम बनाना, आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। लावण्या को कैलिपर उपलब्ध कराया जाना इसी संवेदनशील पहल का प्रेरक उदाहरण है।
लावण्या की कहानी यह संदेश देती है कि जरूरत के समय मिलने वाला सहयोग किसी बच्चे के साथ-साथ पूरे परिवार के जीवन में खुशियों की नई शुरुआत कर सकता है। उसके नन्हे कदम अब उम्मीद, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक बन गए हैं। ‘निदान’ शिविर के माध्यम से मिला यह सहारा परिवार के उस सपने को मजबूती देता है, जिसमें लावण्या भी आगे चलकर आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन की राह तय कर सकेगी।

