बेलरगांव में जसगीतों की गूंज से भक्तिमय हुई रात, शुक्ला डीही की झांकी ने मोहा मन
माता की महिमा के गुणगान में देर रात तक झूमे श्रद्धालु, हजारों की संख्या में उमड़े लोग
नगरी। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर ग्राम बेलरगांव में भक्ति और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। कृषि एवं ग्राम विकास समिति के तत्वावधान में नवदुर्गा एवं विजयादशमी महोत्सव समिति द्वारा आयोजित रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में जसगीत झांकी पार्टी शुक्ला डीही, जिला दुर्ग के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा। माता की भक्ति में सराबोर श्रद्धालु देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।
मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत मंच पर विराजित मां दंतेश्वरी के शैलचित्र पर माल्यार्पण और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके पश्चात अतिथियों ने फीता काटकर सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जसगीत झांकी पार्टी के कलाकारों ने अपनी गायकी, आकर्षक प्रस्तुतियों और भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम के माध्यम से माता की महिमा का गुणगान किया। एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही।
अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के आदिवासी स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त विकास मरकाम शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता नवदुर्गा विजयादशमी महोत्सव समिति बेलरगांव के अध्यक्ष मौर्यध्वज सेन ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य अजय ध्रुव, ग्राम पंचायत बेलरगांव की सरपंच रीता नेताम, जनपद सदस्य नंदनी साहू, भाजपा मंडल बेलरगांव के अध्यक्ष हुमिंत लिमजा, कृषि एवं ग्राम विकास समिति के लिलाम्बर साहू, ग्राम समिति के संरक्षक अशकरण पटेल तथा नगरी के पत्रकार जीतूं साहू उपस्थित रहे।
इसके अलावा समिति के उपाध्यक्ष पोखराज कश्यप, उमेश साहू, सहसचिव गिरधारी देवांगन, ग्राम समिति के सचिव उमेंद्र दीवान, सुरेश देवांगन सहित नवदुर्गा विजयादशमी महोत्सव समिति के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।
बेलरगांव में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने न केवल नवरात्र की धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा दी, बल्कि लोककला और पारंपरिक जसगीतों के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत की।

